चलो चलें संत रामानंद के डेरा,
जहाँ मिले प्रेम, शांति का सवेरा।
बल्ला गाँव की पावन धरती,
जहाँ से उठी सत्य की गाथा भरती।
गुरुवाणी का जो दीप जलाया,
अज्ञान का अंधेरा दूर भगाया।
सेवा, भक्ति, सच्चा उपदेश,
हर दिल में भर दी ईश की रेश।
दरबार में छाया था आनंद,
हर मुख बोले रामानंद।
गरीबों के रखवाले सदा,
हर पीड़ा में बने मरहम दवा।
न जात-पात, न कोई भेद,
उनके शब्दों में था प्रेम का वेद।
भक्ति, करुणा, और तपस्या,
उनकी राह थी जीवन की कश्या।
हर सुबह भजन की गूंज उठती,
हर शाम आरती में जोत जुड़ती।
ज्ञान की गंगा बहती रही,
रामानंद की वाणी कहती रही।
चरणों में उनके चैन मिला,
दुखियों को जैसे वरदान मिला।
बल्ला डेरा एक तीर्थ बना,
जहाँ से हर मन पावन बना।
जय हो संत रामानंद महाराज,
जिनसे रोशन हुआ हर काज।
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