भारत और पाकिस्तान के बीच लम्बे समय बाद एक सकारात्मक संकेत देखने को मिला है। 10 मई 2025 को घोषित किए गए संघर्षविराम (Ceasefire) के बाद दोनों देशों के शीर्ष सैन्य अधिकारी अब प्रत्यक्ष बातचीत की मेज पर आ चुके हैं। यह कदम न सिर्फ दो परमाणु शक्तियों के बीच तनाव कम करने की दिशा में उठाया गया है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।
टकराव से समाधान की ओर
हाल ही में जम्मू-कश्मीर में एक आतंकवादी हमले में 26 हिंदू तीर्थयात्रियों की जान चली गई, जिसके बाद भारत ने "ऑपरेशन सिंदूर" चलाकर सीमा पार स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। पाकिस्तान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई, जिससे दोनों देशों के बीच हालात युद्ध जैसे हो गए थे।
अंततः अमेरिका, ब्रिटेन और सऊदी अरब की मध्यस्थता से 10 मई को बिना किसी शर्त के संघर्षविराम की घोषणा की गई।
वार्ता का उद्देश्य
12 मई को दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की बैठक हुई, जिसका मुख्य उद्देश्य संघर्षविराम का पालन सुनिश्चित करना और भविष्य में किसी भी प्रकार की गोलीबारी या हवाई हमले से बचाव के लिए रणनीति तैयार करना था।
हालांकि भारत ने कुछ संघर्षविराम उल्लंघनों की रिपोर्ट भी दी है, परंतु अब तक स्थिति नियंत्रण में बनी हुई है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक नेताओं ने इस संघर्षविराम और वार्ता की सराहना की है। UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे “शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम” बताया है।
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