समाज में अक्सर बेटियों को लेकर यह धारणा बन चुकी है कि उनकी 'असली मंज़िल' शादी ही होती है। लेकिन कुछ बेटियां ऐसी भी होती हैं जो इस सोच को चुनौती देती हैं और अपने हुनर, आत्मविश्वास और मेहनत से न सिर्फ खुद का जीवन संवारती हैं, बल्कि समाज की सोच को भी बदलने पर मजबूर कर देती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है साक्षी (बदला हुआ नाम) की। सगाई तुड़वाने का फैसला साक्षी एक छोटे से कस्बे से ताल्लुक रखती थी। पढ़ाई में हमेशा अव्वल रही, लेकिन जैसे ही कॉलेज खत्म हुआ, घरवालों ने शादी की बात शुरू कर दी। एक अच्छे घर से रिश्ता भी आ गया और सगाई हो गई। लेकिन मां ने एक शर्त पर यह सगाई तुड़वा दी—"जब तक तू खुद के पैरों पर खड़ी नहीं होती, शादी नहीं होगी।" यह बात साक्षी को अंदर तक झकझोर गई। पहले तो उसे झटका लगा, लेकिन बाद में मां की बात का मतलब समझ आया। मां चाहती थीं कि साक्षी की पहचान सिर्फ किसी की पत्नी या बहू के तौर पर न बने, बल्कि वो खुद एक मुकाम हासिल करे। संघर्ष और सफलता की कहानी समाज में अक्सर बेटियों को लेकर यह धारणा बन चुकी है कि उनकी 'असली मंज़िल' शादी ही होती है।...
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