ADGP हरियाणा वाई. पूरन सिंह आत्महत्या मामला: रोहतक एसपी और डीजीपी की भूमिका पर उठे सवाल
लेखक: Rajender Singh
तारीख: 12 अक्टूबर 2025
Haryana Police, IPS News, Investigation
🔹 घटना की पृष्ठभूमि
हरियाणा पुलिस के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन सिंह (ADGP) की आत्महत्या ने पूरे राज्य प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है।
6-7 अक्टूबर 2025 की रात चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास में उनकी संदिग्ध आत्महत्या की खबर सामने आई।
इस घटना के बाद, उनकी पत्नी — जो स्वयं एक आईएएस अधिकारी हैं — ने कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
सुसाइड नोट में रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजारणिया और हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर के नामों का उल्लेख बताया जा रहा है।
🔹 आरोप क्या हैं?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वाई. पूरन सिंह ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि उन्हें लंबे समय से मानसिक उत्पीड़न, जातिगत भेदभाव, और कार्यस्थल पर अपमान का सामना करना पड़ रहा था।
उनकी पत्नी के अनुसार, उन्होंने कई बार विभागीय स्तर पर शिकायतें भी दीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
🔹 प्रशासनिक हलचल
घटना के बाद हरियाणा सरकार ने तेजी से कार्रवाई करते हुए रोहतक एसपी नरेंद्र बिजारणिया को उनके पद से हटा दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, अब सरकार डीजीपी शत्रुजीत कपूर की भूमिका पर भी विचार कर रही है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि “दोषी चाहे कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो, अगर अन्याय हुआ है तो न्याय जरूर मिलेगा।”
सरकार ने इस मामले की जांच के लिए SIT (स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम) गठित करने का निर्णय लिया है।
🔹 परिवार की मांगें
आईएएस अधिकारी (पूरन सिंह की पत्नी) ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर
दोषी अधिकारियों पर FIR दर्ज करने,
सस्पेंशन,
और परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।
वह चाहती हैं कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हो, ताकि भविष्य में किसी अधिकारी के साथ ऐसा अन्याय न दोहराया जाए।
🔹 जनता और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर JusticeForPuranSingh
लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की CBI जांच कराई जाए।
🔹 निष्कर्ष
यह मामला न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के पुलिस विभागों के लिए एक चेतावनी है —
जहां वरिष्ठ अधिकारी भी यदि मानसिक दबाव में आत्महत्या कर रहे हैं, तो यह सिस्टम की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
न्याय तभी पूरा होगा जब हर दोषी अधिकारी, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो, कानूनी रूप से जवाबदेह बने।
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